मुखातिब होके मुझसे वो यही हर बार कहते हैं ...
तालुक्कात की बात करते हो जज्बात कहा रखते हो !!
समां को जलते रहने की सदा ताकीद देते हो ..
कभी जब आंच आती है तो चेहरा क्यूँ ढकते हो !!
कभी आँखों में झांको और अपना अक्स पहचानों
ये अपनी अजनबीयत आईने में ढूंढते क्यूँ हो !!
अगर मुमकिन है चलना साथ तो आओ मेरे संग तुम
इन अनजान गलियों में भी बेगानों से लगते क्यूँ हो !!
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