नूतन प्रभात की बेला का
आह्वान किया है जन गण ने
अब मचल रही हर एक तरंग
जयघोष किया है किरणों ने
मानव जीवन की अभिलाषा
पूरी होने को लालायित है
समृद्धि शान्ति और खुशहाली
आगे की नई कहानी है
आगाज किया था पांडवों ने
परिणाम मिला था महाभारत
आगाज करेंगे प्राणी समूह
अंजाम मिलेगा समृद्ध भारत
अब रोक नही सकता अन्धकार
शाश्वत की ओर बढे क़दमों को
अब मिलने को आतुर है मंजिल
कोटिजनो के संघर्षों को
अब छिपा हुआ है कहीं तिमिर
शोषित हो जाने के भय से
अब चमक उठा है प्रबल सूर्य
मानव मानव के चिंतन में
छट गई मेघ व्याकुलता की
आशाओं को उत्कर्ष मिला
भावों के प्रबल प्रवाहों को
उत्साह मिला गंतव्य मिला
अब विकास की आंधी से
लहलहा उठा है मानव मन
खिल उठी उमंगो की बेला
करने को प्रणय भाव विह्वल
जागृत मन की अभिलाषा को
विस्तार सहित आकार मिला
अब बढे हुए क़दमों को तो
मंजिल का भी आभास मिला
3 comments:
Wah Wah.. Mishra je.. Kya gajab ki kavita likhe ho.. majaaa aa gaya
are sunil bhai... acchi kavita likhi hai aapne ...!!!
Singhasan hil uthe macro particle nee lekhni thami thee khoob badhe particle degree of freedom nee brukti thami thee...
ache poem hai shayad sunil balramout singnature mein dalna chaoiye
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