Friday, February 6, 2009

जयघोष

नूतन प्रभात की बेला का
आह्वान किया है जन गण ने
अब मचल रही हर एक तरंग
जयघोष किया है किरणों ने

मानव जीवन की अभिलाषा
पूरी होने को लालायित है
समृद्धि शान्ति और खुशहाली
आगे की नई कहानी है

आगाज किया था पांडवों ने
परिणाम मिला था महाभारत
आगाज करेंगे प्राणी समूह
अंजाम मिलेगा समृद्ध भारत

अब रोक नही सकता अन्धकार
शाश्वत की ओर बढे क़दमों को
अब मिलने को आतुर है मंजिल
कोटिजनो के संघर्षों को

अब छिपा हुआ है कहीं तिमिर
शोषित हो जाने के भय से
अब चमक उठा है प्रबल सूर्य
मानव मानव के चिंतन में

छट गई मेघ व्याकुलता की
आशाओं को उत्कर्ष मिला
भावों के प्रबल प्रवाहों को
उत्साह मिला गंतव्य मिला

अब विकास की आंधी से
लहलहा उठा है मानव मन
खिल उठी उमंगो की बेला
करने को प्रणय भाव विह्वल

जागृत मन की अभिलाषा को
विस्तार सहित आकार मिला
अब बढे हुए क़दमों को तो
मंजिल का भी आभास मिला

3 comments:

Unknown said...

Wah Wah.. Mishra je.. Kya gajab ki kavita likhe ho.. majaaa aa gaya

Peeyush..... said...

are sunil bhai... acchi kavita likhi hai aapne ...!!!

Unknown said...

Singhasan hil uthe macro particle nee lekhni thami thee khoob badhe particle degree of freedom nee brukti thami thee...
ache poem hai shayad sunil balramout singnature mein dalna chaoiye